रास्ते की चिट्ठियाँ

शुरुआत के लिए एक शुभ दिन का इंतज़ार

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026

एक और नया दिन, जिसमें मैंने अपने ब्लॉग पर थोड़ा ध्यान देने के अलावा ज़्यादा कुछ नहीं किया। मुझे इसमें मज़ा आने लगा है। वैसे मैं लिखने में कभी ख़ास माहिर नहीं रहा, लेकिन अब यह मुझसे पहले से बेहतर होने लगा है। इसलिए मुझे उम्मीद है कि आपको भी मेरा लिखा उतना ही पसंद आ रहा है, और उसमें इतना प्रवाह है कि वह आपका ध्यान बाँधे रखे।

बाक़ी आज के बारे में बताने को अफ़सोस, ज़्यादा कुछ नहीं है। पूरा दिन बिस्तर पर पड़े रहे और एक बार फिर तरह-तरह के पकवानों से हमारा पेट भर दिया गया। और लगभग भूल ही गया: मैंने ख़ुद को दोपहर की झपकी का भरपूर मज़ा लेना सिखा दिया है। इसमें मैं दिन-ब-दिन बेहतर होता जा रहा हूँ।

बस एक ही दिक़्क़त है कि Yasha की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं चल रही, जबकि यह उसका अपना देश है। आख़िर थोड़ी पश्चिमी हो ही गई है, बेचारी 😉

ऊपर से हमारी क़िस्मत ऐसी है कि हम अभी शुरू नहीं कर सकते। परिवार के अनुसार हिंदू पंचांग में 4 अक्टूबर अच्छा दिन नहीं है। तो हमें 11 अक्टूबर 2026 तक थोड़ा और इंतज़ार करना होगा, क्योंकि वह दिन हमारे बड़े सफ़र की शुरुआत के लिए सच में शुभ माना जाता है।

फ़िलहाल हम और रिश्तेदारों से मिलने वापस भोपाल जा रहे हैं। उसके बाद हम कुछ दिन एक Airbnb में आराम करेंगे, ताकि बस हम दोनों साथ रह सकें। और फिर हफ़्ते के दौरान पूरे जोश से दोबारा जुट जाएँगे।

← सभी पोस्ट